शनिवार, फ़रवरी 09, 2013

दिल अरमानों का समंदर
जिस्म एक किनारा ...

लहरों की सरगोशी

दो भींगे बदन

चर्खाब तेरा लम्स

उठती गिरती साँसें

चंद कतरा रेत

रेत पर लिक्खा
      नाम

मेरा-तुम्हारा।।।।।    " शिव "

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