मंगलवार, दिसंबर 20, 2011

वक़्त की बिसात

पल दो पल का साथ है,
जी भर के,,जी ले ज़िन्दगी 

 वक़्त की क्या बिसात है..
ना जाने कोई...


अभी हम साथ हैं.,

शायद.,कल बिछुड़ना होगा.

परिंदों की तरह,
घोसलों को बदलना होगा..

वक़्त की शह पर,
मोहरों को संभलना होगा,,

शायद.....

फिर कभी ना मिलेंगे ,

हम जुदा हो के....


पल दो पल का साथ है,
जी भर के,,जी ले जिंदगी..

 वक़्त की क्या बिसात है.....
ना जाने कोई...

3 टिप्‍पणियां:

Rajeev Upadhyay ने कहा…

Bahut hi achchha likha hai aapne
अभी हम साथ हैं.,

शायद.,कल बिछुड़ना होगा.

परिंदों की तरह,
घोसलों को बदलना होगा..

वक़्त की शह पर,
मोहरों को संभलना होगा,,
Like these lines

Sarvesh ने कहा…

Ab ke bichde na jane kab mile ...
Na jane pyaar ke phool kab khile...
abhi do pal gujaar le chalo sath me..
kal pata nahi phir hum miley na miley...


its nice poem

Unknown ने कहा…

aap logon ka dhanyabad