थपेड़े ज़िंदगी के
ठोकरें ज़माने कीं,
तोड़ क्या पातीं मुझे,
प्रबल
और प्रबल होता गया।
ठंडे पानी के छीटें
साबित हुए सब ..
शुक्रिया
मुझ सोये को जगाने के लिए।।।।। "शिव"
ठोकरें ज़माने कीं,
तोड़ क्या पातीं मुझे,
प्रबल
और प्रबल होता गया।
ठंडे पानी के छीटें
साबित हुए सब ..
शुक्रिया
मुझ सोये को जगाने के लिए।।।।। "शिव"