भूख
भीषण आग
फैली उनकी बस्तियों में ,
झोंकते पानी की तरह
खून को
आग बुझती नहीं ,
स्वाहा ..
ख्व़ाब,
उम्मीदें,
हंसी
घर
बिस्तर
और
नींद ....
तीन पहियों पर
वो जिंदगी ,
लगातार घुमती रहती है
जीने के लिए
जलती ज़िन्दगी।।।।।। शिवप्रिय आलोक
भीषण आग
फैली उनकी बस्तियों में ,
झोंकते पानी की तरह
खून को
आग बुझती नहीं ,
स्वाहा ..
ख्व़ाब,
उम्मीदें,
हंसी
घर
बिस्तर
और
नींद ....
तीन पहियों पर
वो जिंदगी ,
लगातार घुमती रहती है
जीने के लिए
जलती ज़िन्दगी।।।।।। शिवप्रिय आलोक