जीता हूँ जो
वो इश्क है तेरा ....
दुनिया पूछे सबब
मेरी मदहोशी का .....
क्यूँ कहूं ,
जाम नशीला जो पीता हूँ
वो चश्म है तेरा .....
दुनिया जले
देख मुझ बेवफा की वफ़ा,
मैं जलूँ तश्नगी में तेरी ...
जलूँ फिर भी चलूँ
जुस्तजू जिसकी
वो उफ़ुक है तेरा ...
जीता हूँ जो जीस्त
है तेरा .... शिव
वो इश्क है तेरा ....
दुनिया पूछे सबब
मेरी मदहोशी का .....
क्यूँ कहूं ,
जाम नशीला जो पीता हूँ
वो चश्म है तेरा .....
दुनिया जले
देख मुझ बेवफा की वफ़ा,
मैं जलूँ तश्नगी में तेरी ...
जलूँ फिर भी चलूँ
जुस्तजू जिसकी
वो उफ़ुक है तेरा ...
जीता हूँ जो जीस्त
है तेरा .... शिव