बुधवार, नवंबर 30, 2011

तन्हाई


तन्हाई,
 आ तुझे गले लगा लूं..

तेरे आँचल में छुपकर,
एक सपना सजा लूं.,

सितारों की भीड़ में भटकते चाँद को 
हमसफ़र अपना बना लूं.....

बादलों की पनाह में, 
वो बैठे हों मेरे रूबरू,

होठों से छू कर
उस चाँद का 
शबनम चुरा लूं....

तन्हाई,
 आ तुझे गले लगा लूं....


दूरियां समेटकर 
उसे रूह में मिला लूं,

देखूं बस उसे
खुद को भुलाकर 

इस उम्मीद में 
कि,
छलके आँखों से मदिरा

दो घूँट पिऊ 
और 
जन्मों की प्यास बुझा लूं..

तन्हाई,
 आ तुझे गले लगा लूं..

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