शनिवार, मार्च 09, 2013

भूख
भीषण आग
फैली उनकी बस्तियों में ,

झोंकते पानी की तरह
खून को
आग बुझती नहीं ,

स्वाहा ..
ख्व़ाब, 
उम्मीदें,
हंसी
घर
बिस्तर
और
नींद ....

तीन पहियों पर
वो जिंदगी ,
लगातार घुमती रहती है
जीने के लिए
जलती ज़िन्दगी।।।।।।   शिवप्रिय आलोक 



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